अनुशासन पर निबंध |Discipline Essay in Hindi |Discipline Nibandh

Discipline Essay in Hindi |Discipline Nibandh

किसी भी बड़े कारखाने को देख लीजिएनियमपूर्वक काम कर पाने से ही वह उन्नत हो सका है । यदि नियम में थोड़ी-सी भी गड़बड़ी हो जाये तो सारा व्यवसाय ही चौपट हो जाये। यही नहीं, कोई भी कितना जटिल व्यवसाय हो, व्यवस्था से ही सुचारु रूप से चल सकता है। कई अव्यवस्थित व्यक्ति यह सोचते हैं कि मुख्य लक्ष्य की ओर देखना ही आवश्यक है । सम्बन्धित बातों की विशेष व्यवस्था करने की आवश्यकता नहीं, परन्तु वास्तविकता यह है कि लक्ष्य से सम्बन्धित छोटी छोटी बातों की व्यवस्था परमावश्यक है । जो व्यक्ति छोटी छोटी बातों को ध्यान में नहीं रखता, उससे यह आशा कैसे की । जा सकती है कि वह बड़ी एवं जटिल बातों को सँभाल लेगा ? यदि छोटी-छोटी बातों की ओर ध्यान न दिया जाय तो सारा व्यवसाय ही चौपट हो जाए।

यदि व्यवस्था न की जाए, नियम और अनुशासन न रखा जाए तो व्यक्तियों का बहुतसा समय और शक्ति नष्ट हो जाए। उचित व्यवस्था करके ही शक्ति और समय की बचत की जा सकती है । नियम पर चलते रहने से समय और शक्ति दोनों की बचत होती है । नियमित व्यक्ति अपनी वस्तुओं को | इधर उधर नहीं फेंकतेबल्कि यह नियत स्थान पर रखते हैं, जिससे उन्हें ढूंढने में समय या शक्ति नष्ट नहीं करनी पड़ती। इस प्रकार उनकी शक्ति और समय अन्य लाभप्रद कार्यों में लगते हैं ।

नियम और अनुशासन में रहने से ऐसी बुद्धि प्रस्फुटित होती है, जिसकी सहायता से -सेबड़े काम बहुत आसानी से हो सकते हैं । व्यवस्था के कारण नियमित व्यक्ति थोड़े समय में ही इतना अधिक काम कर लेता है कि लोगों को आश्चर्य होने लगता है । व्यवस्थित होने के कारण उसे सफलता ही सफलता मिलती जाती है ।

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