मेरा भारत महान पर निबंध |Mera Bharat Mahaan Essay in Hindi |Mera Bharat Mahaan Nibandh

Mera Bharat Mahaan Essay in Hindi |Mera Bharat Mahaan Nibandh

इतिहास के अनुसार भारत दस हजार वर्ष पुराना देश है। मोहनजोदड़ो तथा हड़प्पा संस्कृति यहां की प्राचीनतम संस्कृति थी। इसके बाद आर्य जाति का आगमन हुआ। आर्य सांस्कृतिक रूप से सभ्य जाति के लोग थे। आर्यों के कारण देश का नाम आर्यावर्त पड़ा। पुरातन युग में यहां प्रतापी राजा दुष्यंत हुए हैं। इनका विवाह कण्व ऋषि की बालिका सुता शकुन्तला के साथ सम्पन्न हुआ था। शकुन्तला ने सिंह के समान शक्तिशाली पुत्र भरत को जन्म दिया था बाद में इसी युवराज भरत के नाम से देश का नाम ‘भारतवर्षरखा गया। तत्पश्चात् अनेक संस्कृतियों, सभ्यताओं के लोग यहां आकर निवास करते रहे। मध्यकाल में उत्तर-पश्चिम से इस्लाम धर्म के लोगों ने हमारे देश पर आक्रमण किए।

वे लोग भी अंत में यहां के निवासी बने। आज से कई शताब्दियों पूर्व सम्पूर्ण विश्व भारतवर्ष का आधिपत्य मानता था। यहां का शासक चक्रवर्ती सम्राट कहलाता था। यहा की सभ्यता संस्कृति की गूंज सब दिशाओं में सुनाई देती थी। इसके उज्जवल मस्तक के रूप में पर्वतराज हिमालय शोभायमान है। इसके मैदान में गंगा, यमुना, सतलुजकृष्णा आदि अनेक नदियां प्रवाहित होती हैं। इसकी पवित्र धरा में सोना, चांदी, तांबा और लोहा आदि अनेक प्रकार की धातुओं की खान है। नैनीताल और कश्मीर सरीखे प्राकृतिक रमणीय स्थलों ने इसको स्वर्ग से भी सुन्दर बना दिया है।

हमारा देश भारतवर्ष लगभग तीन शताब्दियों तक पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा रहा। इसी बीच अंग्रेजों ने इसे बिल्कुल कंगाल कर दिया था। अंत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के प्रयास से इसकी पराधीनता की बेड़ियां कटी। 15 अगस्त 1947 को इसका विभाजन करके अंग्रेजों ने अपना बिस्तर बांध लिया। इसके दूसरे टुकड़े का नाम पाकिस्तान रखा गया। इसके अलावा बंग्लादेश, बर्मा और श्रीलंका भी एक समय भारत के अंग थे। इस देश-विभाजन से हमें बहुत क्षति पहुंची। भयंकर नर संहार हुआ। लाखों बच्चे अनाथ और औरतें विधवा हुई। अनेक समस्याएं विकराल रूप लेकर खड़ी हो गईं, जिसमें से 50 वर्षों में अधिकांश समस्याओं का समाधान हो गया। शेष का भी शीघ्र ही समाधान हो जाएगा।

इस समय हमारे देश की जनसंख्या एक अरब से अधिक हो चुकी है। इसका क्षेत्रफल 32 लाख 68 हजार 90 वर्ग किलोमीटर है। इस आकार के रूप में भारतवर्ष का विश्व में सातवां स्थान है। हमारे देश भारत में सभी धर्मों के लोग रहते हैं। 26 जनवरी 1950 को हमारा देश संपूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न लोकतांत्रिक गणराज्य बना। तब से लेकर अब तक हमारा देश निरन्तर विकास एवं समृद्धि की ओर अग्रसर है। भारत संघ में 28 राज्य और 7 केन्द्र शासित प्रदेश हैं।

हमारा देश भारत विज्ञान में काफी उन्नति कर चुका है। यह अणुशक्ति में भी किसी बड़े राष्ट्र से पीछे नहीं है। ‘हिन्दी भारत संघ की राष्ट्रभाषा है। राष्ट्र चिहन अशोक स्तम्भ के सिंह’ है। चक्रांकित तिरंगा यहां का राष्ट्रीय ध्वज है। ‘जन मन गण’ हमारा राष्ट्रीय गान तथा ‘वन्देमातरम्’ राष्ट्रीय गीत है। और ‘मोर’ राष्ट्रीय पक्षी तथा बाघ’ राष्ट्रीय पशु है। तुला राष्ट्रपति का चिह्न है।

जलवायु की दृष्टि से भी हमारा देश विश्व में श्रेष्ठ है। यहां प्रकृति ने छ: ऋतुएं दी। हैं। वसंत से प्रारम्भ होने वाला ऋतुओं का यह चक्र ग्रीष्म, वर्षा, शरद तथा हेमंत से होता हुआ शिशिर पर समाप्त होता है। इसीलिए राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त ने कहा है कि घट् ऋतुओं का विविध दृश्य युत अदभुत कम है,

हरियाली का फर्श नहीं मखमल से कम है।
शुचि सुधा सींचता रात में, तुझ पर चंद्र प्रकाश है,
हे मातृभूमि, दिन में तरणि, करता तम का नाश है।”

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