मेरा भारत महान पर निबंध |Mera Bharat Mahaan Essay in Hindi |Mera Bharat Mahaan Nibandh

Mera Bharat Mahaan Essay in Hindi |Mera Bharat Mahaan Nibandh

विश्व का कोई भी ऐसा देश नहीं है जहां हमारे देश की तरह संतुलित जलवायु हो। भारत ही एक ऐसा राष्ट्र है जहां ज्यादा गर्मी भी पड़ती है तो शरद ऋतु में ठंड भी अधिक पड़ती है। वर्षा ऋतु में बारिश भी जमकर होती है। वर्ष भर का वातावरण छ: ऋतुओं में विभक्त है। ज्ञान के भण्डार में भी हमारा देश विश्व में अग्रणी है। विश्व के आदि पुस्तक वे जो कि ज्ञान के भण्डार हैं ऐसे धार्मिक ग्रन्थ विश्व में कहीं नहीं पाये गये। भारत की प्राचीन वास्तुकला अपने आप में एक बेजोड़ नमूना है। भारत का अतीत कितना उन्नत था इस बात का अंदाजा आयुर्वेद, धनुर्वेदज्योतिषगणित राजनीति, चित्रकलावस्त्र निर्माण से लगाया जा सकता है। आज भी विश्व के लोग भारत के अध्यात्म और जीवन मूल्यों के प्रति आकर्षित हैं। यही कारण है कि भौतिक सुखों को त्याग आत्म ज्ञान प्राप्ति के लिए आज भी विदेशियों का भारत आना जारी है। संस्कृति, सभ्यता, जीवन मूल्य, जीवन शैली तथा आत्म विकास का ज्ञान भारत की भूमि के कणकण में व्याप्त है।

हमारे देश की भूमि उपजाऊ है। यहां पर 75 प्रतिशत भारतीय कृषि करते हैं। यहां कुटीर उद्योग उन्नति पर हैं। औद्योगिक उत्पादन प्रगति पर है। इस समय यहां से कपास सनचावल, मसालेतिलहन, चमड़ा, ऊनसिलाई की मशीनें और साइकिलें सूती कपड़ा, सोना, चांदी, तांबा, कांच की वस्तुएंरेशमी वस्त्र, दवाइयां और मशीनें निर्यात की जाती हैं। हमारे देश भारत की सात पंचवर्षीय योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं और आठ पंचवर्षीय योजना चालू है। पंचशील’ और ‘सह-अस्तित्व में हम भारतीयों की पूर्ण आस्था है। हमारे राष्ट्र ने विभिन्न क्षेत्रों जैसे कृषि, उद्योग, विज्ञान एवं परमाणु शक्ति आदि क्षेत्रों में आशातीत प्रगति की है। आज हमारे देश की गणना परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्रों में होती है।

हमारा देश परमाणु शक्ति का प्रयोग मानव जाति के संहार के लिए नहीं बल्कि मानव जाति की भलाई के लिए कर रहा है। भारत हमेशा विश्व में सुख और शांति बनाए। रखने का पक्षधर रहा है। वह विश्व के सभी राष्ट्रों को स्वतंत्र देखना चाहता है। अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत गुटनिरपेक्षता की नीति का सूत्रधार एवं पक्षधर रहा है। हमारे देश की सर्वजन सुखाय व सर्वजन हिताय की भावना में दृढ़ विश्वास है और मानव-मानव । में सद्भाव व प्रेम संचार करने में प्राचीन काल से ही कार्यरत है। परोपकार, त्याग के जितने सुन्दर उदाहरण हमारे महापुरुषों के मिलते हैं शायद ही किसी अन्य राष्ट्र के मिलें। भगवान श्री रामभगवान श्री कृष्णभगवान महावीर, भगवान बुद्धमहर्षि दधीचि आज संपूर्ण मानव जाति के लिए आदरणीय व पूजनीय हैं। इनके अतिरिक्त प्रतापी सम्राट विक्रमादित्य, चन्द्रगुप्त मौर्य, अशोक, अकबर तथा शिवाजी जैसे सम्राट तथा रानी लक्ष्मी बाई, तात्या टोपे सरदार भगत सिंह सुखदेव, राजगुरु चन्द्रशेखर आजाद जैसे महान स्वाधीनता स्वतंत्रता सेनानी भी हमारे ही देश में पैदा हुए हैं।

इस पृथ्वी पर किसी विशेष भू-भाग को, जिसका अपना संविधान हो, जिसकी अपनी संस्कृति हो, देश कहा जाता है। प्रत्येक देश अपनी संस्कृति एवं परम्पराओं का अनुसरण करते हुए उन्नति के पथ पर आगे बढ़ता है । किसी भी देश की मूल संस्कृति उस देश के नागरिकों के आचरण, उनके पर्व, त्योहारों में स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है। हमारा देश भारत एक प्राचीन देश है और इसकी प्राचीनता यहाँ की संस्कृति, परम्पराओं और यहाँ स्थित प्राचीन मंदिरों मस्जिदों इत्यादि में स्पष्ट दिखाई देती है।

हमारे विशाल देश भारत को प्राचीन होने के साथ-साथ मानव सभ्यता के उद्भव एवं विकास का स्रोत होने का भी गौरव प्राप्त है। हमारे प्राचीन देश भारत में ही मानव सभ्यता का आरम्भ हुआ था। प्राचीन काल से ही यहाँ जन्म लेने वाले ऋषिमुनियों, तपस्वीमहात्माओं ने इस पावन भूमि पर मानव का चरित्र एवं समाज के निर्माण हेतु उचित पथ प्रदर्शन किया है। इसी पावन भूमि पर धर्म एवं संस्कृति का विकास हुआ है।

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