गणतंत्र दिवस पर निबंध |Republic Day Essay in Hindi |Republic Day Nibandh

Republic Day Essay in Hindi |Republic Day Nibandh

२६ जनवरी१९२९ को रावी नदी के तट परलाहौर कांग्रेस अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू के सभापतित्व में पूर्ण स्वतंत्रता (स्वाधीनता) का प्रस्ताव पास हुआ। उसी दिन भारतवासियों ने प्रतिज्ञा की कि हम शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करेंगे। अतउसी दिन से प्रतिवर्ष २६ जनवरी हमारे लिए राष्ट्रीय पर्व का रूप धारण कर चुकी थी। प्रतिवर्ष इस दिन प्रभातफेरियाँ निकाली जातीं, झंडे का अभिवादन होता और राष्ट्रीय गीत गाए जाते। स्वाधीनता के उपरांत २६ जनवरी१९५० को नया संविधान लागू हुआ और भारत ‘पूर्ण प्रभुसत्ता संपन्न जनतंत्रात्मक गणराज्य’ बना। संयोग की बात है कि बीस वर्ष पूर्व जिनकी अध्यक्षता में स्वाधीनता का प्रस्ताव पारित हुआ था, वे नेहरू ही हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने। गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व है।

सभी नागरिक इसे उत्साह से मनाते हैं । शासन की ओर से इसकी तैयारियाँ महीनों पहले से आरंभ हो जाती हैं। २६ जनवरी को देश के कोने-कोने में उल्लास और हर्ष छा जाता है ।सभी स्थानों पर प्रभातफेरियाँ निकाली जाती हैं। सरकारी तथा गैरसरकारी संस्थानों पर राष्ट्रध्वज फहराया जाता है। लोग ध्वज का अभिवादन करते हैं और राष्ट्रीय गीत गाते हैं। इसके उपरांत सड़कों पर परेड होती है। पुलिस तथा सेना के जवान परेड करते हुए निकलते हैं। इसके पश्चात् कुछ मनोरंजक सांस्कृतिक झाँकियाँ निकाली जाती हैं। स्कूलोंकॉलेजों के छात्र-छात्राएँ भी इसमें शामिल होते हैं।

बैंड-बाजों की धुनों से आकाश गूंज उठता है। राष्ट्रध्वज फहराया जाता है। प्रदेशों की राजधानियों में राज्यपालों द्वारा झंडा फहराया जाता है तथा स्वाधीनता की रक्षा की प्रतिज्ञाँ को दोहराया जाता है। दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। सुबह अंधेरे से ही हजारों लोग राजपथ की ओर चल देते हैं। प्राय: आठ बजे राष्ट्रपति महोदय अपनी कार पर बैठकर विजय चौक पधारते और झंडा फहराते हैं। फिर उन्हें तोपों की सलामी दी जाती है । वे विजय चौक के समीप बनाए गए विशेष मंच पर पधारते हैं।

सबसे पहले जलथल और वायु सेनाओं के जवान मार्च करते हुए आगे बढ़ते हैं। वे राष्ट्रपति को सलामी देते हैं। सेनाओं के बैंड जनता का मन मोह लेते हैं। विभिन्न सेनाओं की टुकड़ियाँ टैंकोंतोपों आदि का प्रदर्शन करती हुई जब आगे बढ़ती हैं तो उनके पीछे भारत के विभिन्न प्रदेशों की सांस्कृतिक झाँकियाँ एक-एक करके आती हैं, जिनसे जनता का न केवल मनोरंजन होता है, बल्कि ज्ञान-संवर्धन भी होता है।

मणिपुरीकत्थकलीभरतनाट्यम्गरबा और भंगड़ा आदि विविध भारतीय नृत्य दर्शकों में हर्ष तथा उल्लास का संचार करते हैं, जो भारत की विविधता में एकता को दर्शाते हैं। इसके उपरांत स्कूली बच्चों के अनेक दल देशभक्ति के गीत गातेनाचतेराष्ट्रपति महोदय के सामने से गुजरते हैं। गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर भारत के नागरिक देश के पवित्र संविधान की मर्यादा की रक्षा करने का प्रण करते हैं।

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