चिड़ियाघर की सैर पर निबंध | Zoo Tour Essay in Hindi | Zoo Tour Nibandh

Zoo Tour Essay in Hindi | Zoo Tour Nibandh

पिछले रविवार को मौसम बहुत अच्छा था। आकाश में बादल छाये हुये थे। मैं अपने मित्रों के साथ चिड़ियाघर की सैर करने गया। चिड़ियाघर के मुख्य द्वार पर बहुत भीड़ थी। लोग प्रवेश के लिए टिकट खरीद रहे थे। कुछ अन्य छायादार वृक्षों के नीचे गप-शप कर रहे थे और कुछ मौसम का आन्नद ले रहे थे। जैसे ही हमने चिड़ियाघर में प्रवेश किया हमें एक झील देखने को मिली जिसमें बतखें तैर रही थीं। सफेद बतखों को पानी में अठखेलियां करते देखने में बहुत अच्छा लगता है। जब हम आगे बढ़े हमने कुछ उड़ने वाली मुर्गियाँ देखीं। इसके अतिरिक्त वहाँ बहुत प्रकार के एवं विभिन्न रंगों की चिड़िया, कबूतरएवं तोते देखे। चिड़ियाँ चहचहा रही थीं। जिससे एक सुखदायी संगीत उत्पन्न हो रहा था। हमने इसका भरपूर आन्नद उठाया।

आगे शेरतेंदुआ एवं चीतों का रहने का स्थान था। शेर एवं शेरनी के गुरने की आवाजें दूर तक आ रही थीं। हम जाली के पास गये। एक शेर को तेजी से अपनी ओर आता देख हम डर गये। उनको देखने के पश्चात हमने पेड़ों के झुरमुट में हिरन एवं बारहसिंहों को घूमते देखा। इनकी सुन्दरता ने मन को मोह लिया। एक अन्य कोने में बन्दरों के पिंजरे थे। बन्दरों एवं लंगूरों ने पेड़ों पर उछलकुछ मचाई हुई थी। उनके करतब बहुत मनोरंजक थे। कुछ लोग उन्हें खाने का सामान देते थे और वह पेड़ो से कूदकूद कर खाते थे। कुछ बच्चे उन्हें मुंह बना-बना कर चिढ़ा रहे थे। हमारा अगला पड़ाव अक्वेरियम (मछली घरजल जीव शाला) था जिसमें हमें सबसे अधिक रुचि थी। उसमें बहुत से जलचर रखे गये थे। वहाँ बहुत से रंगों एवं विभिन्न प्रकार की मछलियां थीं। उन्हें पानी में चुहल करते देख कर बहुत अच्छा लगता है वहाँ बहुत से अन्य जलचर भी थे। इसके साथ ही एक पोलर भालू भी रखा गया था किन्तु उसको देखकर ऐसा लगा कि वह यहाँ उदास और अकेला है। काले भालू के पिंजरे के बाहर बहुत से लोग जमा हुये हुये थे। भालू बहुत से करतब दिखा रहा था। जिससे देखने वाले रोमांचित हो रहे थे। कुछ लोगों ने उसे खाने का सामान दिया जो उसने एक बार में निगल लिया।

दिल्ली का चिड़ियाघर इतना बड़ा है कि उसके प्रत्येक हिस्से एवं जानवरों को देख पाना एवं उसके बारे में बताना बहुत कठिन है। जब हमने पूरा चिड़ियाघर देख लिया तो हम वहीं पर एक बगीचे में सुन्दर सा स्थान देख कर बैठ गये। सुन्दर फूल और उनकी मोहक सुगन्ध से स्वर्गिक आन्नद की अनुभूति हुई। तत्पश्चात हमने थोड़ा-बहुत कुछ खाया-पिया। जिससे हमें नयी स्फूर्ति आयी। शाम हो चुकी थी एवं सूरज ढ़ल रहा था। बहुत से अन्य दर्शकों के साथ हम भी चिड़ियाघर से बाहर आयेचिड़िया घर एक तरफ पुराने किले की दीवार से घिरा हुआ है जो इसके सौन्दर्य एवं वैभव में वृद्धि करता है। हम वापिस आने के लिये बस पर सवार हुये एवं एक अन्तिम दृष्टि चिड़ियाघर पर डाल उससे विदा ली। मुझे चिड़ियाघर का यह रोमांचक अनुभव सदैव याद रहेगा।

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