श्रीमती इंदिरा गाँधी पर निबंध |Mrs. Indira Gandhi Essay in Hindi |Mrs. Indira Gandhi Nibandh

Mrs. Indira Gandhi Essay in Hindi |Mrs. Indira Gandhi Nibandh

इंदिरा का जन्म प्रयाग के आनंद भवन में November 19, 1997 को हुआ। इनके पितामह मोतीलाल नेहरू चोटी के वकील तथा प्रख्यात राजनीतिज्ञ थे। इंदिरा के पिताजी जवाहरलाल नेहरू प्रसिद्ध नेता थे। इंदिरा की माताजी कमलादेवी दिल्ली के सीताराम बाजार के निवासी (कश्मीरी) जवाहरलाल कौल की पुत्री थीं।

जवाहरलाल को भारतीय सभ्यता का भक्त बनाने में उनकी पत्नी कमलादेवी का भारी हाथ । कमलादेवी प्रायबीमार रहती थीं और नेहरू प्राय: जेल में रहते थे। अतइंदिरा था का बाल्यकाल अकेलेपन में व्यतीत हुआ। इनका एक भाई भी हुआ था जो अल्पवय में ही चल बसा था। इंदिरा प्रियदर्शिनी ने कुछ समय प्रयाग में ही शिक्षा पाई। फिर इनको रवींद्रनाथ के ‘शांति निकेतन’ में प्रविष्ट कराया गया। जब इनकी माता कमलादेवी अधिक बीमार हो गई तब जवाहरलालजी उन्हें इलाज के लिए स्विट्जरलैंड ले गए। वे इंदिरा को भी साथ ही ले गए थे। वहाँ कमलादेवी की मृत्यु हो गई । लौटते हुए जवाहरलाल अपनी पुत्री इंदिरा को लंदन के एक स्कूल में प्रविष्ट करा आए थे।

इंदिरा का विवाह फिरोज गांधी नामक युवक से 26 March 1942 को हुआ था। फिरोज गांधी बहुत हंसमुखउदार और देशभक्त थे। वे पत्रकार थे और बाद में संसद के सदस्य भी रहे। इनके राजीव तथा संजय दो पुत्र हुए। सन् 1960 में श्री फिरोज गांधी का स्वर्गवास हो गया। सन् 1947 में भारत स्वाधीन हुआ और जवाहरलाल भारत के प्रधानमंत्री बनेतब इंदिरा उनकी सहायिका बन गई और उन्हें राजनीति तथा प्रशासन की समस्याओं का निकटता तथा सूक्ष्म रीति से अध्ययन करने और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का सुअवसर मिला।

पिता के साथ रहकर इंदिरा ने न केवल देश के प्रशासन का गहरा अनुभव ही प्राप्त किया अपितु पिता के साथ-साथ संसार के प्राय: सभी बड़े देशों की यात्रा करके, वहाँ के प्रशासन की विभिन्न गतिविधियों तथा विभिन्न प्रकार की राजनीतिक विचारधाराओं का भी प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। एक वर्ष के लिए ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष भी बनीं। इस काल में इन्होंने देश के प्राय: सभी भागों की यात्रा करके अपने देश की मुख्य समस्याओं को खूब अच्छी तरह से समझ लिया।

27 May 1964 को जवाहरलाल नेहरू की अचानक मृत्यु हो गई। इसके बाद श्री लालबहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने तब इंदिरा गांधी को सूचना तथा प्रसारण

मंत्री । 1965 में भारत-पाक युद्ध हुआ। उसमें भारत की विजय हुई। रूस के बनाया गया ताशकंद नगर में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधान फील्ड मार्शल अय्यूब में भारत के तथा
प्रधानमंत्री में शांति समझौता संपन्न हुआलालबहादुर श्री लालबहादुर शास्त्री , परंतु शास्त्रीजी का वहीं देहांत हो गया।

उनके बाद इंदिरा गांधी को भारत का प्रधानमंत्री बनाया गया। सन् 1967 में आम चुनाव। संपन्न हुआ और इंदिरा गांधी दुबारा प्रधानमंत्री चुनी गई।

सन् 1971 में श्रीमती इंदिरा गांधी ने मध्यावधि चुनाव कराने का साहस किया और उसमें उनके दल नई कांग्रेस को भारी बहुमत मिला। December 3, 1971 को पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर दिया। इस समय श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व व सूझबूझ के कारण पाकिस्तान चौदह दिनों में ही बुरी तरह परास्त हुआ। उन्होंने बैंगलादेश को स्वतंत्र कराकर उसे वहाँ के नेताओं के हाथों सौंप दिया।

इसके बाद भारत में प्रादेशिक चुनाव हुए। उनमें भी इंदिरा गांधी की भारी विजय हुई। इंदिरा गांधी की नीतियों के कारण भारत ने श्रीलंका, बर्मा, अफगानिस्तान, इराक, नेपाल भूटान, सिक्किम बंगलादेश से अच्छे मैत्री संबंध स्थापित किए। पाकिस्तान से संबंध सामान्य करने के लिए उसके एक लाख कैदी छोड़कर भारी कदम उठाया। शिमला समझौता से दोनों देशों में वार्तालाप द्वारा समस्याओं को सुलझाने का मार्ग खुल गया। May 18, 1974 में भारत ने जो परमाणु विस्फोट किया, उससे प्रकट है कि देश वैज्ञानिक प्रगति में अब किसी से पीछे नहीं रहा। इसका श्रेय श्रीमती इंदिरा गांधी को ही दिया जाता है।

इसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने श्री राजनारायण की चुनाव याचिका मंजूर करके उनका संसद सदस्य के रूप में चुनाव रद्द कर दिया। परंतु पंद्रह दिन की छूट (स्टे-ऑर्डर) दी। गईजिस बीच श्रीमती गांधी उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में अपील कर सकें। विरोधी दलों ने उच्चतम न्यायालय के निर्णय से पूर्व ही, श्रीमती गांधी के इस्तीफे की माँग शुरू कर दी। इसके लिए वे बवंडर उठाने को तैयार हो गए। 26 June 1975 को श्रीमती इंदिरा गांधी की सलाह पर राष्ट्रपति श्री फखरुद्दीन अली अहमद ने आपात्कालीन स्थिति की घोषणा कर दी। कई संस्थाओं को कानूनविरुद्ध घोषित कर दिया गया। जुलाई 1975 को प्रधानमंत्री ने बीस सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की।

1977 में जनता पार्टी की भारी बहुमत से जीत हुई 1977 से 1979 तक जनता पार्टी का शासन रहा। सन् 1980 में आम चुनाव में फिर इंदिरा कांग्रेस की जीत हुई। 31 October 1984 को अपने ही अंगरक्षकों की गोलियों से इंदिरा गांधी का देहावसान हो गया।

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