कंप्यूटर पर निबंध | Computer Essay in Hindi | Computer Nibandh

Computer Essay in Hindi |Computer Nibandh

हमारे जीवज में कंप्यूटर की उपयोगिता एक समय था, जब लोगों के पास गणना करने के लिए कुछ भी नहीं था। वे लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़ों का इस्तेमाल करते थे, दानेदार वस्तुओं का भी उपयोग करते थे। दिन-महीने याद रखने के लिए दीवारों पर चित्र बना लिया करते थे। सन् 1833 में एक और मशीन तैयार की गईजिसे चार्ल्स बैबेज ने तैयार किया था। उसका नाम ‘डिफरेंस मशीन’ (Diference Machine) रखा गया था। उस मशीन में कई पहिए लगे हुए थे। उन पहियों को घुमाने से गणितीय प्रश्नों के हल मिलते थे। उस मशीन में एक बहुत बड़ा दोष था, जिसके चलते वह अधिक सफल नहीं रही। दोष यह था कि उस मशीन से एक ही काम लिया जा सकता था। चार्ल्स बैबेज ने एक नए प्रकार की मशीन तैयार करने का निर्णय लिया।

चार्ल्स बैबेज ने अपने प्रयासों के चलते एक नए प्रकार की मशीन बना ली। उस मशीन में ‘प्रोग्राम’ बनाकर प्रश्नों को हल किया जा सकता था। उस मशीन का नाम ‘एनालिटिकल इंजन’ (Analytical Engine) रखा गया। चार्ल्स ने जो सिद्धांत उस इंजिन को बनाने के लिए अपनाया था, आज कंप्यूटर में भी उसी सिद्धांत का इस्तेमाल किया जाता है। इसीलिए चार्ल्स बैबेज को ‘कंप्यूटर का जनक’ कहा जाता है। हाँ, चार्ल्स बैबेज ने एनालिटिकल इंजन बनाने का जो सिद्धांत दिया था, उसे पूरा करने से पूर्व ही उसकी मृत्यु हो गई थी।

उसके इस अधूरे कार्य को उसकी एक प्रिय मित्र लेडी एडा Lady Ada) ने पूरा किया था। इस तरह दुनिया का सबसे पहला प्रोग्रामर लेडी एडा को माना जाता है। चार्ल्स बैबेज और ब्लेज पास्कल द्वारा बनाई गई मशीनें पूरी तरह से यांत्रिकीय थीं। वहीं ‘हर्मन हॉलरिथ’ Herman Hollerth) ने सबसे पहले विद्युत् शक्ति का प्रयोग करके एक मशीन का आविष्कार किया और उस मशीन का नाम ‘टेबुलेटर’ (Tabulator) रखा।

टेबुलेटर के आविष्कार से अंकगणित के प्रश्नों के हल आसान हो गए। हर्मन हॉलरिथ ने अपने आविष्कार को बेचने के लिए एक कंपनी बनाई। उस कंपनी का नाम टेबुलेटिंग कंपनी’ रखा गया था। आगे चलकर ‘टेबुलेटिंग कंपनी में अनेक कंपनियाँ मिल गईं। ऐसे में उसका नाम बदला गया। उसका नाम ‘आईबीएम’ IBM: International Business Machine) रखा गया। आज की दुनिया में सबसे ज्यादा कंप्यूटर बनानेवाली कंपनी आईबीएमही है। सन् 1943 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के ‘हावार्ड आइकेन’ ने एक अन्य मशीन का आविष्कार किया।

उसका नाम ‘मार्क-१’ (MARK1) रखा गया। दो वर्षों के बाद सन् 1945 में संयुक्त राज्य अमेरिका में एक इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर का आविष्कार किया गया। उसका नाम ‘एनिएक’ (E.NIA.: Electronic Numeric Integrator and cal culator) था। इस तरह आधुनिक कंप्यूटर का आगमन हुआ। कंप्यूटर के प्रयोग से हमें तरह-तरह के लाभ हैं- कंप्यूटर बहुत ही कम समय में कोई भी कार्य पूरा कर देता है। इसकी गति MOPS तक की होती है।

कंप्यूटर द्वारा जो गणना की जाती है, वह बिलकुल सटीक होती है। कंप्यूटर बार-बार किए जानेवाले कार्य को भी बड़ी आसानी से करता है। वह व्यक्ति की तरह न तो थकता है और न ही अपनी जिम्मेदारी को नजरअंदाज करता है। कंप्यूटर अनेक लोगों का कार्य अकेले कर सकता है। इसकी मेमोरी (स्मरण शक्ति) बहुत ज्यादा होती है। आज का युग कंप्यूटर युग है।

जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र बचा नहीं है, जिसमें कंप्यूटर का उपयोग न होता हो। शिक्षाचिकित्साविज्ञान, वाणिज्य, बैंकिंग क्षेत्र तो इस पर पूरी तरह निर्भर हैं।

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