कल्पना चावला पर निबंध | Kalpana Chawla Essay in Hindi | Kalpana Chawla Nibandh

 Kalpana Chawla Essay in Hindi | Kalpana Chawla Nibandh

मैं किसी एक क्षेत्र या देश से बाधित नहीं हूं। मैं इन सबसे हटकर मानव जाति का गौरव बनना चाहती हूं। यह कहना था पहली भारतीय मूल की महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का जो आज हमारे बीच नहीं है। उनकी प्रतिभा, लगन और उनका समस्त विश्व को दिया योगदान सदा अविस्मरणीय रहेगा। कल्पना को बचपन से ही पढ़ने तथा हवाई करतब में काफी रुचि थी। उल्लेखनीय है कि कल्पना के पास विमान एवं ग्लाइडर के प्रमाणित उड़ान निदेशक का लाइसेंस था। कल्पना विभिन्न किस्म के विमानों की कॉमर्शियल पॉयलट थी। भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री होने का गौरव हासिल करने वाली कल्पना चावला का जन्म हरियाणा के करनाल जिले में 8 जुलाई 1961 को एक व्यापारी परिवार में हुआ था।

कल्पना ने स्कूल शिक्षा करनाल के टैगोर स्कूल से प्राप्त की थी। पंजाब इंजीनियरिंग कालेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद कल्पना चावला ने 1984 में टेक्सास से इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कोलोराडो से पी. एचडी. की उपाधि प्राप्त की। कल्पना 1988 में नासा में शामिल हुई।

यहां रहकर उन्होंने कई शोध किये कल्पना चावला ने इसके बाद अमेरिका के एम्स में फ्यूड डायनॉमिक पर काम शुरू किया। एम्स में सफलता पूर्वक काम करने के बाद कल्पना चावला ने 1993 में केलिफोर्निया की ओवरसेट मैथड्स इन कारपोरेशन में उपाध्यक्ष और रिसर्च वैज्ञानिक के रूप में काम शुरू किया। यहां रहते हुए इन्होंने भविष्य के अंतरिक्ष मिशन के लिए कई अनुसंधान किये1994 में नासा ने सुश्री कल्पना चावला का अंतरिक्ष यात्री के रूप में चयन किया। इस प्रकार कल्पना चावला मार्च 1995 में पन्द्रहवें अंतरिक्ष समूह से जुड़ गयी।

एक वर्ष के प्रशिक्षण और मूल्यांकन के बाद सुश्री कल्पना को रोबोटिक्स, अंतरिक्ष में विचरण से जुड़े तकनीकी विषयों पर काम करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गयी। एक वर्ष के प्रशिक्षण के बाद कल्पना को एस्ट्रानॉट आफिस रोबोटिक्स एवं कम्प्यूटर ब्रांच के लिए तकनीकी मुद्दों का दायित्व सौंपा गया। 1996 नवम्बर में उन्हें मिशन स्पेशलिस्ट का भार सौंपा गया। 19 नवम्बर से 5 दिसम्बर 1997 तक वे एसटी. एस87 पर प्राइम रोबोटिक आर्म ऑपरेटर रही। एसटी. एस87 अमेरिका की माइक्रोग्रेविटी पेलोड पाइलट थी। इसका उद्देश्य भारहीनता का अध्ययन करना था। सुश्री कल्पना चावला के काम करने के तौर तरीकों व दिये गये कार्यों के परिणामों को देखकर उन्हें मिशन विशेषज्ञ का दायित्व सौंपा गया।

इसके अलावा उन्हें प्रमुख रोबोटिक्स आर्म ऑपरेटर भी बनाया गया। पांच साल के अंतराल के बाद कल्पना चावला दूसरी बार अंतरिक्ष मिशन पर गयी। 16 जनवरी को अंतरिक्ष मिशन पर गये कोलंबिया यान ने अंतरिक्ष में 80 शोध पूरे कर लिए थे।

उक्त शोध मानव अंगोंशरीर में कैंसर कोशिकाओं के विकास तथा गुरुत्वाकर्षण विहीन अवस्था में विभिन्न कीट-कीटाणुओं की स्थिति के अध्ययन हेतु किये गये थे। सोलह दिनों की इस यात्रा में कोलंबिया यान हर 90 मिनट में पृथ्वी की एक परिक्रमा करता रहा। इस यान में कल्पना चावला के साथ मिशन के प्रमुख रिक हस्बैंडपायलट बिली मैक्ल, अभियान विशेषज्ञ डेव ब्राऊनएक अन्य महिला अंतरिक्ष यात्री लौरल क्लार्क, पेलोड कमांडर माइक एंडरसन और पेलोड विशेषज्ञ इलान रैमोन सवार थे। कोलंबिया का यह 28 वां अभियान था।

परिक्रमा के दौरान पृथ्वी से 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ रहे इस यान की गति 17 हजार 500 मील प्रति घंटा थी। सोलह दिन के अंतरिक्ष अभियान से लौट रहा अमरीकी अंतरिक्ष यान कोलंबिया 2 फरवरी की शाम धरती से 63 किलोमीटर की ऊंचाई पर धमाके के साथ टूटकर बिखर गया। यान में सवार कल्पना सहित सभी अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गयी। उस समय यान की गति 20 हजार किलोमीटर प्रति घंटा थी। यान का मलबा अमरीका के टेक्सास शहर में गिरा।

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