गर्मी की छुट्टी पर निबंध | Summer Vacation Essay in Hindi | Summer Vacation Nibandh

Summer Vacation Essay in Hindi | Summer Vacation Nibandh

ग्रीष्मावकाश के कारण प्रत्येक विद्यालय में ग्रीष्म से राहत पाने के लिए कुछ न-कुछ अवकाश अवश्य हुआ करता है। हमारे विद्यालय में भी इस वर्ष 1 मई से 2 माह का अवकाश हुआ था। इन दिनों मेरे कुछ सम्पन्न साथियों ने तो दिल्ली की भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए पहाड़ी स्थलों पर भ्रमण के लिए जाने का कार्यक्रम बनाया। परन्तु मैंने अपने मातापिता और भाई-बहनों के साथ दक्षिण भारत का पर्यटन करने जाने की सोची।

15 मई तक तो मैंने अपना गृहकार्य पूरा किया। तत्पश्चात् 15 मई से हम पर्यटन जाने की तैयारी करने लगे। मेरे पिता जी एक सरकारी कर्मचारी हैं, उन्हें सरकार की ओर से पर्यटन के लिए किराया अर्थात् LTc. मिलता है, इसलिए हमने इसका लाभ उठाया।

हमने तमिलनाडु टूरिज्म की एक बस में जो 18 मई को दक्षिण भारत के लिए जाने वाली थी, पाँच टिकटें बुक करा ल। फिर हमने तैयारी प्रारम्भ कर दी। 18 मई की रात्रि को 10 बजे बस निश्चित स्थान आरकेपुरम) पर तैयार खड़ी थी । हम सभी अपने सामान के साथ वहाँ पहुँच गए तथा बस में नियत स्थान पर बैठ गए। लगभग साढ़े ग्यारह बजे वह बस सभी यात्रियों को लेकर शुभ यात्रा के लिए रवाना हो गईक्योंकि उसे दिल्ली सीमा को 12 बजे के बाद ही पार करना था।

यहाँ से चलकर बस प्रातः लगभग 7 बजे जयपुर पहुँची। सब लोग वहाँ थोड़ा घूमेनाश्ता किया और आगे चल पड़े। रुकतेरुकाते दो दिन पश्चात् हम माउण्ट आबूपहुँचे। वहाँ हमने भव्य जैन मन्दिर, ब्रह्मा कुमारी आश्रम आदि देखे। अगले दिन प्रातः हम आगे बढ़े। मुम्बईगोवा होते हुए हम लगभग एक सप्ताह पश्चात् दक्षिण भारत अर्थात् कन्याकुमारी जा पहुँचे। वहाँ पहुँचकर एक रात्रि विश्राम किया।

अगले दिन प्रातकाल लगभग चार बजे समुद्र के किनारे पहुंचे। वहाँ हमने वह स्थान देखा जहाँ तीन महासागरों का मिलन होता है। एक ओर बंगाल की खाड़ी है, दूसरी ओर अरब सागर है तथा सामने हिन्द महासागर है। तभी हमने समुद्र के मध्य से सूर्य देवता को उदित होते हुए देखा जो बहुत ही रमणीय दृश्य था।

फिर हमने वहाँ सायं को सूर्यास्त भी देखा। कन्याकुमारी का यह दृश्य अभी तक नहीं भुलाया जा सका। इसके पश्चात् वहीं समुद्र के मध्य में एक चट्टान पर बने स्वामी विवेकानन्द का स्मारक देखने भी गए। यह भी बहुत अच्छा लगा। वहाँ अनेक मन्दिरों के भी दर्शन किए। तत्पश्चात् हम मण्डयम रेलवे स्टेशन तक अपनी बस में गए तथा वहाँ से रेल द्वारा रामेश्वरम् पहुँचे। रामेश्वरम् में हमने समुद्र में स्नान किया।

वहाँ समुद्र का जल बहुत ही स्वच्छ था। उस जल में छोटी-छोटी मछलियाँ बहुत सुन्दर लग रही थीं। वहाँ हमने रामेश्वर धाम के मन्दिरों में स्नान व पूजा-अर्चना की। वहाँ एक साथ 35-40 कुइयाओं के जल में स्नान करना होता है जिसका बहुत ही महात्य हाता ह तत्पश्चात् वहां से हम 31 मई को वापस चल दिए।

वापसी में हमने शिरडी बाबा के भी दर्शन किए। इस प्रकार घूमते-घुमाते हम 8 जून को सकुशल अपने घर पहुँच गए। घर आकर कुछ आराम किया तथा शेष गृहकार्य किया। कुछ दिन अपने परिचितों को प्रसाद बांटने में भी व्यस्त रहा। इस प्रकार मैंने अपना ग्रीष्मावकाश बहुत अच्छे ढंग से बिताया।

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